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Wednesday, September 2, 2020

बौद्ध धर्म/दर्शन (Buddhism / philosophy) Indian History |

बौद्ध धर्म/दर्शन (Buddhism / philosophy)

बौद्ध धर्म/दर्शन (Buddhism / philosophy)


* ईसाई और इस्लाम धर्म से पूर्व बौद्ध धर्म की उत्पत्ति मानी जाती है। इन दोनों धर्म के बाद यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। इस धर्म को मानने वाले ज्यादातर चीन, जापान, कोरिया, थाईलैंड, कंबोडिया, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और भारत आदि देशों में रहते हैं।
गुप्तकाल में यह धर्म यूनान, अफगानिस्तान और अरब के कई हिस्सों में फैल गया था किंतु ईसाई और इस्लाम के प्रभाव के चलते इस धर्म को मानने वाले लोग इन इलाकों में अब नहीं के बराबर बची है।
दो शब्दों में बौद्ध धर्म को व्यक्त किया जा सकता है- अभ्यास और जागृति। 
बौद्ध धर्म नास्तिकों का धर्म है। कर्म ही जीवन में सुख और दुख लाता है। सभी कर्म चक्रों से मुक्त हो जाना ही मोक्ष है। कर्म से मुक्त होने या ज्ञान प्राप्ति हेतु मध्यम मार्ग अपनाते हुए व्यक्ति को चार आर्य सत्य को समझते हुए, अष्टांग मार्ग का अभ्यास कहना चाहिए यही मोक्ष प्राप्ति का साधन माना गया है।

 भगवान बुद्ध (ईसा पूर्व 563- 483 ईसा पूर्व)

- बुद्ध के पिता:-  कपिलवस्तु के राजा शुद्धोदन  
- माता का नाम:-  महारानी महामाया देवी  
- बुद्ध की पत्नी का नाम:-  यशोधरा 
- पुत्र का नाम:-  राहुल
- बौद्ध धर्म के संस्थापक:-  भगवान बुद्ध 
- इस धर्म के दो संप्रदाय है:-  हिनयान और महायान 
* वैशाख माह की पूर्णिमा का दिन बौद्धों का प्रमुख त्योहार होता है। 
- बौद्ध धर्म के चार तीर्थ स्थल हैं:- लुंबिनी, सारनाथ, बोधगया, और कुशीनगर। 
- बौद्ध धर्म के धर्मग्रंथ को त्रिपिटक कहा जाता है।
- भगवान बुद्ध को गौतम बुद्ध, सिद्धार्थ और तथागत भी कहा जाता है। ‍



जन्म:- वैशाख माह की पूर्णिमा के दिन बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बिनी में ईसा पूर्व 563 को हुआ।
          इसी दिन 528 ईसा पूर्व उन्होंने भारत के बोधगया में सत्य को जाना और 
          इसी दिन वे 483 ईसा पूर्व को 80 वर्ष की उम्र में भारत के कुशीनगर में निर्वाण (मृत्यु) को प्राप्त किया 
- जब बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई उसी वर्ष आषाढ़ की पूर्णिमा को वे काशी के पास सारनाथ) पहुँचे। वहीं पर उन्होंने सबसे पहला धर्मोपदेश दिया था |

बौद्ध सम्प्रदाय-

                बुद्ध के निर्वाण के बाद द्वितीय बौद्ध संगति में भिक्षुओं में मतभेद के चलते बोद्ध धर्म दो भागो मे विभाजित हो गया । पहले को हिनयान और दूसरे को महायान कहते हैं। 
(1) महायान अर्थात बड़ी गाड़ी या नौका( महायान के अंतर्गत बौद्ध धर्म की एक तीसरी शाखा थी वज्रयान।)
(2) हिनयान अर्थात छोटी गाड़ी या नौका। हिनयान को ही थेरवाद भी कहते हैं।
- झेन, ताओ, शिंतो आदि अनेकों बौद्ध सम्प्रदाय भी उक्त दो सम्प्रदाय के अंतर्गत ही माने जाते हैं।

प्रमुख शिष्य :- 
                   आनंद, अनिरुद्ध, महाकश्यप,भद्रिका, भृगु,किम्बाल, देवदत्त, उपाली  रानी खेमा (महिला),                           महाप्रजापति (महिला),  आदि। 

प्रमुख प्रचारक:- अँगुलिमाल, मिलिंद (यूनानी सम्राट), सम्राट अशोक, ह्वेन त्सांग, फा श्येन, ई जिंग, हे चो                         आदि।

बौद्ध धर्मग्रंथ:-
                 बुद्ध ने अपने उपदेश पालि भाषा में दिए थे, जो त्रिपिटकों में संकलित हैं। 
                 त्रिपिटक के तीन भाग है- (1) विनयपिटक,(2) सुत्तपिटक और (3) अभिधम्मपिटक 
 - बौद्ध धर्म के मूल तत्व है- 1.चार आर्य सत्य, 2.आष्टांगिक मार्ग, 3.प्रतीत्यसमुत्पाद, 4.अव्याकृत प्रश्नों पर बुद्ध का मौन, 6.बुद्ध कथाएँ, 7.अनात्मवाद और 8.निर्वाण आदि।


बौद्ध तीर्थ स्थल :- 
                      लुम्बिनी, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर ये चार प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल है, जहाँ विश्वभर के बौद्ध अनुयायी बौद्ध त्योहार पर इकट्‍ठा होते हैं। लुम्बिनी तीर्थ नेपाल में है। बोधगया भारत के बिहार में है। सारनाथ भारत के उत्तरप्रदेश में काशी के पास हैं। कुशीनगर उत्तरप्रदेश के गोरखपुर के पास का एक जिला है।

चार आर्य सत्य
    बुद्ध ने चार आर्य सत्य बताये थे।

1. दुःख                 2. दुःख कारणhttps://jangiracademy.blogspot.com/
4. दुःख निरोध       4. दुःख निरोध का मार्ग

अष्टांगिक मार्ग
1. सम्यक् दृष्टि- वस्तुओं के यथार्थ स्वरूप को जानना ही सम्यक् दृष्टि होती है।
2. सम्यक् संकल्प- आसक्ति, द्वेष तथा हिंसा से मुक्त विचार रखना ही सम्यक् संकल्प होता है।
3. सम्यक् वाक्- सदा सत्य तथा मृदु वाणी का प्रयोग करना ही सम्यक् वाक् है।
4. सम्यक् कर्मान्त- इसका आशय अच्छे कर्मों में संलग्न होने तथा बुरे कर्मों के परित्याग से होता है।
5. सम्यक् आजीव- विशुद्ध रूप से सदाचरण से जीवन-यापन करना ही सम्यक् आजीव है।
6. सम्यक् व्यायाम- अकुशल धर्मों का त्याग तथा कुशल धर्मों का अनुसरण ही सम्यक् व्यायाम है।
7. सम्यक् स्मृति- इसका आशय वस्तुओं के वास्तविक स्वरूप के संबंध में सदैव जागरूक रहना है।
8. सम्यक् समाधि - चित्त की समुचित एकाग्रता ही सम्यक् समाधि है।
- मार्ग को तीन हिस्सों में वर्गीकृत किया जाता है : प्रज्ञा, शील और समाधि।

पंचशील
1. अहिंसा             2. अस्तेय
3. अपरिग्रह          4. सत्य
5. सभी नशा से विरत

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