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Wednesday, September 23, 2020

Major Forts of Rajasthan (राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले) Rajasthan GK ! Part -1 For Rajsthan Police, Patwar, Reet etc...

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले (Major Forts and Forts of Rajasthan)

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग व किले (Major Forts and Forts of Rajasthan)




राजस्थान की स्थापत्य कला का जनक राणा कुम्भा को माना जाता है । मुगल काल में राजस्थान की स्थापत्य कला पर मुगल शैली का प्रभाव पडा था। हिन्दू कारीगरों ने मुस्लिम आर्दशों के अनुरूप जो भवन बनाए, उन्हें सुप्रसिद्ध कला विशेषज्ञ फर्ग्युसन ने इंडो-सारसेनिक शैली की संज्ञा दी थी।

* शुक्र नीति में दुर्गो की नौ श्रेणियों का वर्णन मिलता है :-

1. एरण दुर्ग :- खाई, कांटों तथा कठौर पत्थरों से दुर्गम मार्ग युक्त दुर्ग।
                   जैसे :– रणथम्भौर दुर्ग।

2. गिरी दूर्ग :- एकांत में पहाड़ी पर हो तथा जल संचय प्रबंध हो ।
                   जैसे :– कुम्भलगढ़

3. पारिध दूर्ग :- ईट, पत्थरों से निर्मित मजबूत परकोटा युक्त दुर्ग ।
                  जैसे :– चित्तौड़गढ दुर्ग

4.  सैन्य दूर्ग :- जिसकी व्यूह रचना चतूर वीरों के होने से अभेद्य हो यह दुर्ग सेन्य दुर्ग कहा जाता हैं ।

5.  पारिख दूर्ग :- जिसके चारों ओर खाई हो उसे पारीख दुर्ग कहा जाता है ।
                 जैसे :– लोहगढ़/भरतपुर दुर्ग

6. जल दुर्ग :- चारों तरफ पानी से घिरा हुआ दुर्ग ।
                 जैसे :– गागरोन दुर्ग

7. वन/ओरण दूर्ग :- चारों ओर सघन वन से ढ़का हुआ दुर्ग।
                जैसे :- सिवाणा दुर्ग

8. सहाय दूर्ग :- सदा साथ देने वाले बंधुजन जिस दुर्ग में हो।

9. धान्व दूर्ग :- जो चारों ओर रेत के ऊंचे टीलों से घिरा हुआ दुर्ग।
                जैसे :– जैसलमेर

 राजस्थान के दुर्ग 

1. रणथम्भौर दुर्ग (सवाई माधोपुर) :-

- निर्माता  :– अजमेर के चौहान शासको द्वारा निर्मित |
- श्रेणी :– यह दुर्ग एरण, गिरी, वन दुर्ग तीनू श्रेणी में आता है |
- अबुल फजल के इस दुर्ग के बारे में कहा है – “अन्य सब दुर्ग नँगे है, जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद है।“
- यह दुर्ग अंडाकार आकृति की पहाड़ी पर बना हुआ है इसलिए दूर से देखने पर दिखाई नही देता है।
- यह दुर्ग विषम आकार की सात पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
- इस दुर्ग में इमारतें – हम्मीर महल, रानी महल, सुपारी महल, हम्मीर की कचहरी, बादल महल, जोरा-भोरां, 32 खम्भो की छतरी, जोगी महल, पीर सदरुद्दीन की दरगाह, त्रिनेत्र गणेश मंदिर आदि।

2. चित्तौड़गढ़ दुर्ग (चितौड़गढ़) :-

- निर्माता :– सातवीं शताब्दी में चित्रांगद मौर्य द्वारा (सिसोदिया वंश)
- अन्य नाम :– चित्रकूट, राजस्थान का गौरव, राजस्थान का दक्षिणी प्रवेश द्वार, राजस्थान के दुर्गों का सिरमौर |
- श्रेणी :– यह दुर्ग गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है |
- यह दुर्ग क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा दुर्ग है।
- प्रचलित कहावत :– “गढ़ तो चितौड़गढ़, बाकी सब गढ़ैया”
- इस दुर्ग में पांडव पोल, लक्ष्मण पोल, जोड़ला पोल, भैरव पोल, हनुमान पोल, गणेश पोल, रामपोल नामक सात दरवाजे बने हुए है।

- साके :- इस दुर्ग में तीन साके हुए थे –

1. प्रथम साका :- 
- सन् 1303 ई. में मेवाड़ के महाराणा रावल रतनसिंह के समय चित्तौड़ का प्रथम साका हुआ।
- रानी पद्मिनी द्वारा जौहर किया गया था।
- आक्रमणकारी :– अल्लाउद्दीन खिलजी था।
- उसने दुर्ग का नाम बदलकर खिजाबाद रखा था ।
-  चित्तौड़गढ के प्रथम साके में रतन सिंह के साथ सेनानायक गोरा व बादल मारे गए।

2. द्वितीय साका :- 
- 1534-35 ई. में मेवाड़ के शासक विक्रमादित्य के समय बहादुर शाह ने आक्रमण किया।
- महाराणी कर्मावती ने जौहर किया था।

3. तृतीय साका :-
- सन् 1567-68 ई. में महाराणा उदयसिंह के समय मुगल सम्राट अकबर ने आक्रमण किया।
- तृतीय साका जयमल राठौड़ और पता सिसोदिया के पराक्रम और बलिदान के लिए प्रसिद्ध है।

दर्शनीय स्थल :-
1. विजय स्तम्भ :-
- सांरगपुर का युद्ध (1437 ई.) में महाराणा कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी को पराजित किया था।
- मेवाड के महाराणा कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में 1439-40 में भगवान विष्णु के निमित विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया था। इसे विष्णु स्तम्भ भी कहते है।
- यह स्तम्भ 9 मंजिला तथा 120 फीट ऊंचा है।
- विजय स्तम्भ को भारतीय इतिहास में मूर्तिकला का विश्वकोष अथवा अजायबघर भी कहते हैं
- विजय स्तम्भ का शिल्पकार जैता, नापा, पौमा और पूंजा को माना जाता है।

2. जैन कीर्ति स्तम्भ :-
- चित्तौडगढ़ दुर्ग में स्थित जैन कीर्ति स्तम्भ का निर्माण अनुमानतः बघेरवाल जैन जीजा द्वारा 11 वीं या 12      वी. शताब्दी में करवाया था।
- यह 75 फुट ऊंचा और 7 मंजिला है।

- इस दुर्ग में अन्य दर्शनीय स्थल कुम्भ श्याम मंदिर, मीरा मंदिर, पदमनी महल, फतेह प्रकाश संग्रहालय तथा कुम्भा के महल आदि प्रमुख दर्शनिय स्थल है।
*  गुजरात के शासक बहादुर शाह ने 1533, 1535में  चितोड़ पर दो बार आक्रमण किया।

3. तारागढ दुर्ग (बूंदी) :-

- निर्माता :– इस दुर्ग का निर्माण 1354 ई.में राव बरसिंह हाड़ा ने करवाया |
- श्रेणी :– यह  गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है |
- गुप्त सुरंगों के कारण इसे राजस्थान का तिलस्मी किला कहते है।
- इस दुर्ग में गर्भ गुंजन व महाबला तोप स्थित है।
- कर्नल टॉड ने बून्दी के महलों को राजपूताने के श्रेष्ठ महलों में माना है।
 - इस महल में फूल महल, दुधा महल, रानीजी की बावड़ी, 84 खम्बो की छतरी स्थित है।

4. अजयमेरू दुर्ग {तारागढ़(अजमेर)} :-

-  निर्माता :– इस दुर्ग का निर्माण 1113 ई. में अजयराज चौहान द्वारा करवाया गया |
-  श्रेणी :– यह दुर्ग, गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है |
- अन्य नाम :– गढ़ बिठली, तारागढ़ दुर्ग, राजस्थान का जिब्राल्टर आदि |
- तारागढ़ दुर्ग के भीतर प्रसिद्ध मुस्लिम संत मीरान साहेंब (मीर सैयद हुसैन) की दरगाह स्थित है।
- तारागढ़ दुर्ग की अभेद्यता के कारण विशप हैबर ने इसे “राजस्थान का जिब्राल्टर ” अथवा “पूर्व का दूसरा जिब्राल्टर” कहा है।
- इस दुर्ग में नाना साहब का झालरा, गोल झालरा, इब्राहिम शरीफ क् झालरा आदि जल संरक्षण के लिए कुण्ड बने है।

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